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सुडोकू का इतिहास: इसे किसने और कब बनाया

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सुडोकू का आविष्कार संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ, इसे जापान में नाम मिला और ब्रिटेन में यह लोकप्रिय हुआ। इंडियानापोलिस के सेवानिवृत्त वास्तुकार Howard Garns ने इसे “Number Place” के नाम से बनाया। यह पहली बार मई १९७९ में Dell Pencil Puzzles & Word Games में प्रकाशित हुआ। जापानी प्रकाशक Nikoli ने १९८४ में इसे पेश किया और सुडोकू नाम दिया। १२ नवंबर २००४ को The Times of London ने इसे छापना शुरू किया, जिसके बाद यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। इसकी जड़ें १८९० के दशक के फ़्रांसीसी अख़बारों और १७८० के दशक में Leonhard Euler के लैटिन वर्गों तक जाती हैं।

वर्षक्या हुआस्रोत
१७८२Euler ने ३६ अधिकारियों की समस्या रखी, लैटिन वर्गों से जुड़ा एक बुनियादी सवालMAA Convergence
१८९२Le Siècle (पेरिस) ने ३×३ उपवर्गों वाली ९×९ जादुई वर्ग की पहेली छापीChristian Boyer
१८९५La France ने B. Meyniel का ९×९ ग्रिड छापा, जिसमें १ से ९ तक के अंकों का इस्तेमाल थाChristian Boyer
१९७९Dell ने Howard Garns की “Number Place” प्रकाशित की (मई अंक)Crown Hill Heritage Foundation
१९८४Nikoli ने इसे जापान में पेश किया और इसका नाम रखाNikoli
१९८६Nikoli ने दिए गए अंकों को सममित ढंग से रखने की परंपरा जोड़ीNikoli
२००४The Times ने १२ नवंबर को “Su Doku” प्रकाशित करना शुरू कियाWayne Gould
२००५Sudoku Live का प्रसारण Sky One पर १ जुलाई को हुआGuinness World Records
२००६पहली World Sudoku Championship, लुक्का में १० से १२ मार्च तकWorld Puzzle Federation
२०१२कंप्यूटर खोज से साबित हुआ कि कम से कम १७ दिए गए अंकों की ज़रूरत होती हैMcGuire et al.
२०२१Nikoli के संस्थापक और “सुडोकू के जनक” Maki Kaji का १० अगस्त को निधनAl Jazeera, NPR

लैटिन वर्ग: गणितीय पूर्वज

लैटिन वर्ग n×n का ऐसा ग्रिड होता है जिसमें हर पंक्ति और कॉलम में हर प्रतीक एक बार आता है। हल किया हुआ सुडोकू एक ९×९ लैटिन वर्ग होता है, जिसमें ३×३ बॉक्स का एक अतिरिक्त नियम भी होता है। Leonhard Euler ने १७८० के दशक में इन ग्रिडों का अध्ययन किया। उनकी “३६ अधिकारियों की समस्या” सबसे प्रसिद्ध है। इसमें पूछा गया है कि क्या छह रेजिमेंटों के छह अलग-अलग रैंक वाले ३६ अधिकारियों को ६×६ वर्ग में इस तरह खड़ा किया जा सकता है कि किसी पंक्ति या कॉलम में कोई रैंक या रेजिमेंट दोहराई न जाए (MAA Convergence)। Euler गणित का अध्ययन कर रहे थे, पहेलियाँ नहीं बना रहे थे, इसलिए उन्हें सुडोकू का आविष्कारक कहना कुछ ज़्यादा होगा।

१८९० के दशक के फ़्रांसीसी अख़बारों की पहेलियाँ

इसके सबसे नज़दीकी पुराने रूप फ़्रांसीसी अख़बारों में दिखे। १८९२ में Le Siècle ने ३×३ उपवर्गों में बँटी ९×९ संख्या पहेली प्रकाशित की, जिसे जादुई वर्ग के रूप में बनाया गया था। ६ जुलाई १८९५ को दैनिक अख़बार La France ने B. Meyniel का ग्रिड छापा। उसमें हर पंक्ति और कॉलम में १ से ९ तक के अंक एक-एक बार आते थे, और पुरानी पहेलियों में यह सुडोकू से सबसे मिलता-जुलता था। इसमें ३×३ बॉक्स नहीं बनाए गए थे, और इसके साथ जादुई वर्ग के नियम थे, जिनके अनुसार विकर्णों का योग ४५ होना चाहिए। पहेली इतिहासकार Christian Boyer ने इन ग्रिडों को फिर खोजा और २००६ में Pour La Science में प्रकाशित किया (Boyer, Sudoku's French ancestors)। Boyer यह भी बताते हैं कि Euler के १७८२ के लैटिन वर्ग वाले शोधपत्र में ३×३ उपवर्ग नहीं थे।

Howard Garns और Number Place (१९७९)

आधुनिक पहेली पहली बार Dell Pencil Puzzles & Word Games के मई १९७९ के अंक में Number Place नाम से छपी। Dell ने लेखक का नाम नहीं दिया था। बाद में पता चला कि लेखक Howard Garns (१९०५ से १९८९) थे, जो इंडियानापोलिस के सेवानिवृत्त वास्तुकार और स्वतंत्र पहेली-निर्माता थे (Crown Hill Heritage Foundation)। Garns ने लैटिन वर्ग में बॉक्स का नियम जोड़ा, जो इस पहेली का आधार है। सुडोकू के लोकप्रिय होने से पहले, १९८९ में उनका निधन हो गया।

Nikoli ने इसे सुडोकू नाम दिया (१९८४)

टोक्यो के पहेली प्रकाशक Nikoli को एक अमेरिकी पहेली पत्रिका में Number Place मिली। १९८४ में उसने इसे “Suuji wa dokushin ni kagiru” नाम से जापान में पेश किया, जिसका मोटे तौर पर अर्थ है “हर अंक अकेला होना चाहिए”। जल्द ही नाम छोटा होकर Sudoku (数独) हो गया, जिसका अर्थ है “एक अंक”। १९८६ में Nikoli ने दिए गए अंकों को सममित ढंग से रखने की परंपरा शुरू की (Nikoli)। जापान में सुडोकू Nikoli का पंजीकृत ट्रेडमार्क है, इसलिए दूसरे जापानी प्रकाशक इस पहेली को Number Place कहते हैं।

Nikoli के संस्थापक Maki Kaji ने दशकों तक इस पहेली को लोकप्रिय बनाने का काम किया और उन्हें व्यापक रूप से “सुडोकू का जनक” कहा जाता था। १० अगस्त २०२१ को ६९ वर्ष की उम्र में टोक्यो में उनका निधन हुआ (NPR, Al Jazeera)।

Wayne Gould और The Times (२००४)

हांगकांग में काम कर रहे न्यूज़ीलैंड के सेवानिवृत्त न्यायाधीश Wayne Gould को १९९७ में टोक्यो में सुडोकू की एक किताब मिली। उन्होंने सिर्फ़ एक संभव हल वाले पज़ल बनाने वाला सॉफ़्टवेयर लिखने में लगभग छह साल लगाए। फिर उन्होंने The Times को ये पज़ल छापने की पेशकश की। अख़बार ने १२ नवंबर २००४ को “Su Doku” प्रकाशित करना शुरू किया (Wayne Gould)। कुछ ही हफ़्तों में ब्रिटेन के दूसरे अख़बारों ने भी इसे छापना शुरू कर दिया। जुलाई २००५ तक Sky One पर Sudoku Live नाम का लाइव टीवी शो आ गया था। Guinness इसे सुडोकू पर पहला टीवी कार्यक्रम बताता है।

प्रतियोगिताएँ और गणित (२००६ से आगे)

World Puzzle Federation ने मार्च २००६ में इटली के लुक्का में पहली World Sudoku Championship आयोजित की। इसे चेक गणराज्य की Jana Tylová ने जीता (WPF)। उसके बाद से यह प्रतियोगिता ज़्यादातर सालों में आयोजित हुई है। जापान के Kota Morinishi के नाम सबसे ज़्यादा, चार ख़िताब हैं। सभी विजेताओं की सूची हमारे सुडोकू के विश्व रिकॉर्ड (अंग्रेज़ी में) पेज पर है।

गणितज्ञों ने भी इसमें दिलचस्पी ली। २००५ में Bertram Felgenhauer और Frazer Jarvis ने ६,६७०,९०३,७५२,०२१,०७२,९३६,९६० संभावित ग्रिड गिने। २०१२ में University College Dublin की एक टीम ने साबित किया कि सुडोकू में कम से कम १७ दिए गए अंकों की ज़रूरत होती है। दोनों बातें सुडोकू के पज़ल कितने हो सकते हैं (अंग्रेज़ी में) में समझाई गई हैं।

क्या सुडोकू जापानी है या चीनी?

ठीक-ठीक कहें तो, दोनों में से कोई नहीं। पहेली संयुक्त राज्य अमेरिका में बनाई गई थी और इसका नाम जापानी है। इसकी उत्पत्ति चीन में नहीं हुई, हालाँकि प्राचीन चीनी लो शु वर्ग जैसे लैटिन वर्गों से मिलते-जुलते संख्या विन्यासों का ज़िक्र कभी-कभी दूर के पूर्वजों के रूप में किया जाता है। जादुई वर्ग एक अलग पहेली है: उसमें पंक्तियों, कॉलम और विकर्णों का योग एक समान होना चाहिए, जबकि सुडोकू में किसी भी तरह की गणना की ज़रूरत नहीं होती।

अख़बार से फ़ोन तक

आज ज़्यादातर लोग स्क्रीन पर सुडोकू हल करते हैं। ऐप्स में ऐसी सुविधाएँ हैं जो काग़ज़ पर नहीं मिलतीं: अपने आप नोट्स भरना, पिछली चाल वापस लेना, ग़लतियों की जाँच और अनगिनत पज़ल। लेकिन कई मुफ़्त ऐप विज्ञापनों से भरे होते हैं। Sudoku Royale अख़बार जैसा अनुभव बनाए रखता है: साफ़-सुथरा बोर्ड और कोई विज्ञापन नहीं। इसमें रोज़ का पज़ल भी है और बेहतर खेलने के लिए तकनीकों का अभ्यास भी। काग़ज़ से ऐप पर आने के सुझावों के लिए सुडोकू ऐप चुनना (अंग्रेज़ी में) देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सुडोकू का आविष्कार किसने किया?

इंडियानापोलिस के सेवानिवृत्त वास्तुकार Howard Garns ने Number Place नाम से आधुनिक पहेली बनाई। Dell Pencil Puzzles & Word Games ने इसे मई १९७९ में प्रकाशित किया। Nikoli ने १९८४ में जापान में इसका नाम सुडोकू रखा।

क्या सुडोकू जापानी है?

इसका नाम जापानी है, लेकिन पहेली का आविष्कार संयुक्त राज्य अमेरिका में हुआ था। जापानी प्रकाशक Nikoli ने १९८४ में इसे अपने हिसाब से ढाला और Sudoku नाम दिया। यह उस वाक्यांश का छोटा रूप है जिसका अर्थ है कि हर अंक अकेला होना चाहिए।

सुडोकू का क्या अर्थ है?

Sudoku (数独) का मोटे तौर पर अर्थ है “एक अंक”। यह Suuji wa dokushin ni kagiru का छोटा रूप है, जिसका अर्थ है “हर अंक अकेला होना चाहिए”। Nikoli ने १९८४ में इस पहेली को यह नाम दिया था।

सुडोकू कब लोकप्रिय हुआ?

१९८० के दशक के आख़िर से यह जापान में लोकप्रिय था। फिर १२ नवंबर २००४ को The Times of London ने इसे छापना शुरू किया, जिसके बाद यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गया। २००५ के दौरान ब्रिटेन और अमेरिका के दूसरे अख़बारों ने भी इसे छापा।

सुडोकू का जनक कौन है?

पहेली कंपनी Nikoli के संस्थापक Maki Kaji को जापान में सुडोकू का नाम देने और उसे लोकप्रिय बनाने के लिए व्यापक रूप से सुडोकू का जनक कहा जाता है। १० अगस्त २०२१ को उनका निधन हुआ। मूल पहेली Howard Garns ने बनाई थी।

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